ॐ

Shri Nath Siddho ki Guru Shishay Parmpra

गुरु वंदना

॥ॐ॥


गुरुर्ब्रह्मा गुरु विष्णु: गुरु देवो महेश्वर: ।

गुरु: साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः ॥

ध्यान मूलं गुरुमूर्ति: पूजामूलं गुरुपदम् ।

मंत्र मूलं गुरु वाक्य, मोक्ष मूलं गुरु कृपा ॥

मंत्र सत्य पूजा सत्य, सत्यवच निरंजनम् ।

गुरु वाक्य सदा सत्य, सत्यं एक परंपदम् ॥


(1)


सत्य सनातन, परम ईश्वर । सत गुरु नाथ, आनंद सागर ॥

पापर रहन, पूरण मरदता । राखो भाव, भक्ति समता ॥

कृपा करदो, कर दो राखो । इसलिए भाव, स्वरूपी लाग्यो ॥

धर्म कर्म, योग उपदेश । पितृ स्वरूपी, कृपा करदो ॥

(2)


जड़ अज्ञान, हम जीवात्मा । ज्ञान चक्षु, प्रगटायो परमात्मा ॥

हृदय तले, ज्ञान से प्रगटायो । अंतर आत्मा, भ्रम को मिटायो ॥

नाम दिया जो, मंत्र अगाध । शिव गोरख योगी, शब्द सिद्ध ॥

भेद योग, चेतन दिखलाया । माया भोग, वैराग्य दिलवाया ॥

(3)


शुद्ध अमावसि, शुक्ल पक्षी । मंगल दासी, मंगल दिन साक्षी ॥

देख मनका, शुद्ध भाव । दीनी दीक्षा, किया स्वीकार ॥

दीनी ज्ञान, अपार । भव सागर से, किया पार ॥

करि सतगुरु, यह सत जीवन । गुरु शिष्य, परमात्म मिलन ॥

(4)


अगम से आया, निगम को जाना । सत्य कहकर, सत्य को पाना ॥

शब्द स्वरूप, सर्ग शिव । पीयो अमृत, सदगुरु देता ॥

सत्य सतगुरु, सहज हो पाया । परख लिया, भेद बताया ॥

सतत संगति, सतगुरु तार । सतगुरु मेरो, कृपा सागर ॥

(5)


सोप दिया जब, जीवन का भार । निश्चित किया, जीवन का सार ॥

हाथ सतगुरु, रहो दयावंता । और कौन दिया, कोई देता ॥

नाद जगे, ज्ञान नाद मृद्गा । भेद भाव, सतगुरु दीक्षा ॥

तुम कारण हम, भये अनंता । लाज राखो, गुरु विधि संतता ॥

(पुस्तक: श्री नाथ सिद्ध पाठ)


लेखक श्री नंद गुरु डॉ. योगी विलास नाथ जी महाराज (के सान्निध्य से)

अखिल भारतीय अवधूत योगी महासभा

अध्यक्ष, प्रचार प्रसार