ॐ

Satguru Parikrama

धन्य धन्य है, परिक्रमा सतगुरु नाथों की ।

होगी कृपा सतवर दर्शन आत्माराम की ॥

धरणी धरनी, अमरपुर, परंपरा यह रही ।

सभी तीर्थ हैं, चरण कमल में, शिव शुभाशिष करती ॥

धन्य धन्य………

मृदंग ताल, ढोल बाजे, सत गुरु प्रेमानन्दी ।

नाम संकीर्तन, नाद भरे, हर्ष आनन्दी ॥

धन्य धन्य………

जनम मरण के, बन्धन काटे, किये योग युक्ति ।

गुरु मंत्र का, ध्यान धरे, मिले मोक्ष मुक्ति ॥

धन्य धन्य………

अगम निगम का, ज्ञान की धारा, सतगुरु भक्ति का ।

जीव शिव में, मिले तत्व, सतगुरु संग का ॥

धन्य धन्य………

ज्ञान ध्यान में, सच्ची भक्ति, जानो तो बिचार ।

ओर प्रगटित, पारस मणि, जाने जीवन जैसा ॥

धन्य धन्य………

परिक्रमा ही, करते करते, आत्माराम देखा ।

प्रगट भयो जो गुरु गोरख, नाथ विलास देखा ॥

धन्य धन्य………







धन्य धन्य है, परिक्रमा सतगुरु नाथों की ।

होगी कृपा सतवर दर्शन आत्माराम की ॥