सतगुरु नाथ नमन करूँ मैं, दर्शन तो दे दो ।
मन मंदिर में, वास करके पावन मम कर दो ॥
प्रतिदिन पाऊँ नाथ, शेष आनन्द मम कारण बन दो ।
हिय निवासि दया ही करके, परिवर्तन दे दो ॥
सतगुरु नाथ……
उपकार तुम्हारे, बहुत हुए हैं, तुम कारण तन देऊँ ।
उपदेश तुम्हारे, ईश्वर निरंकार, मन अनुगमन पाऊँ ॥
सतगुरु नाथ……
कौन कहा पर, कौन कारण, जन-मन-तन देऊँ ।
करो मम ऐसा, अलख निरंजन, सब सम जन देखूँ ॥
सतगुरु नाथ……
समाग मार्ग, भ्रम को भागा, मम निर्भय कर दो ।
जनम मरण को, यह सब भ्रम, मुक्त मम कर दो ॥
सतगुरु नाथ नमन करूँ मैं, दर्शन तो दे दो ।
मन मंदिर में, वास करके पावन मम कर दो ॥
(पुस्तक: श्री नाथ सिद्ध पाठ)
लेखक श्री महंत गुरु डॉ. योगी विलास नाथ जी महाराज (के सौजन्य से)
अखिल भारतीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा
अध्यक्ष, प्रचार प्रसार