गंगा गोता, अनूपम शिला। सुमेर बैठे, गोरख बाला॥
यंत्र करे तीर्थ, अठारह की सेवा। शब्द सिद्ध, सिद्धों का मेला॥2॥
बैठे योगी, और नव नाथ। बीच सभा के, गोरख नाथ॥3॥
नाथ कहे, अब सुनो जी सिद्ध। सतत पंथ के, गोरखी सिद्ध॥4॥
ॐकार आदिनाथ के, अनुपम शिष्य। प्रथम उदयनाथ, पूर्वी सिद्ध॥1॥
माया महेन्द्र, जलन्धर शिष्य। इनकी माया, जग में प्रसिद्ध॥2॥
सत्य मत्स्येन्द्र, सदगुरु शिव। शास्त्र का, किया था अभ्यास॥3॥
मार्कण्डेय नाथ जी, महानतमकार। इनको नतमस्तक, बारम्बार॥4॥
मीन नाथ जी, सिद्ध विश्वनाथ। त्याग वैराग, प्रमाण प्रत्यक्ष॥1॥
सत्यनव जी, सिद्ध नाथ। यज्ञवल्क्य उनके, प्रियतम शिष्य॥2॥
अचल अच्युत, जती शेष अवतार। संतोषनाथ जी, शिष्य परम॥3॥
नाथ कहे यह, सिद्धों की टोली। सिद्धि सिद्धि, नव सिद्धि की झोली॥4॥
जलंधर नाथ के, उत्तम शिष्य। चिटेणी, श्रृंगी, गोपीचंद सिद्ध॥1॥
कानिफा उत्पत्ति, गज कंठनाथ। रीत चले पंथ के साथ॥2॥
अजर अमर थे, तंत्र के ज्ञाता। योगीन्द्र नाथ, लिये साधना॥3॥
नाथ कहे जो, सुनते आदेश। महेन्द्र नाथ के, शिष्य सदेश॥4॥
माया महेन्द्र के, गोरख शिष्य। ॐकार आदिनाथ के, स्वयं अवतार॥1॥
मत्स्येन्द्र, गोरख सिद्ध। तंत्र ज्ञान, अनेक सिद्ध॥2॥
काल नाथ जी, सिद्धनाथ सिद्ध। महा अघोरी, कपिल सिद्ध॥3॥
नारदा शारदा, प्रभुदेव सिद्ध। गुरु भक्ति में, मंत्र मुख्य॥4॥
सत गुरु गोरख, मेरे शिष्य। महेन्द्र नाथ, मनोभाव शब्द॥1॥
ऐसे महेन्द्र, शिष्य प्राणी। जन मन रंजन, सब गुण भानी॥2॥
योग युक्ति के, सांधे काया। काल तले तन लीपे माया॥3॥
कहे नाथ जी, गुरु गोरख योगी। देखो शिष्य जो, अतीव भोगी॥4॥
गुरु गोरख तो, सबसे निराले। आपके गुरु, आपके चेले॥1॥
कटक, भैरव, विष्णु सदाई। आठे पंथ के, यह चराई॥2॥
ब्राह्मण, दरवाई, सिद्ध दरवाई। नागा के नाथ, रीत चलवाई॥3॥
श्रीनाथ भगवान, नाथ सन्यासी। गोरखनाथ से, भय वरदाई॥4॥
सनातन तो, गोरख अवतार। तीन लोक के, भय करतार॥1॥
सूरत निरत ये, घोड़ा चढ़ाया। ध्यान तपस्या, तन को तपाया॥2॥
आई पुण्य के, सत्संग संग। परम पद पर, की पहचान॥3॥
खेचर मुद्रा, नाथ गुरु गोरख। जल थल पवन के, कुछ चमत्कार॥4॥
विषयों और, सिद्ध राई। पवन हरी थे, वे बलवाई॥1॥
कपिल मुनि के, दत्तात्रेय शिष्य। सागर सागर में, जग प्रसिद्ध॥2॥
चर्पटीनाथ के, शिष्य बलेश्वर। राजयोग से, आयुर्वेदाचार्य॥3॥
नाथ कहे यह, पंथ के योगी। जन मन रंजन, रमता जोगी॥4॥
राजा भर्तहरि, नाथ गोपीचंद। अमर कथा, भव अभ्यानन्द॥1॥
नाथ बालक, और प्रकाश सिद्ध। गोरखनाथ सह, भय प्रसिद्ध॥2॥
कर्पटी नाथ, और सिद्ध गोरख। त्याग वैराग में, अनोखी परख॥3॥
नाथ कहे यह, पंथ वरणा। नाथ सिद्धों में, अमर अनूठा॥4॥
लंका राज्य के, लंका नाथ। राम बाण से मुक्ति पात॥1॥
इनके शिष्य थे, केवट राजा। जन जन मन में, कीर्ति उजागर॥2॥
भेद, तंत्र से, रहस्य प्रकट। शिव शक्ति के, करे भक्ति॥3॥
नाथ कहे यह, लोकनाथ जी। नेत्र गुण जो, चले कहानी॥4॥
नाम लक्ष्मण, के बालकाण्ड। पंथ दत्तेश्वरी, रीत चलाई॥1॥
चक्र चक्र, सिद्ध वीर नाथ। पंथ दत्तेश्वरी, भगवा भेष॥2॥
दया दरिया, दरियानाथ। सिद्ध बुढानाथ, महान संत॥3॥
नाथ कहे यह, पंथ के जोगी। दरिया दत्तेश्वरी, समरस भोगी॥4॥
सिद्ध रतन जी, बड़े अनमोल। कंचन कछार, की खेल चला॥1॥
नाथ कपिल जी, इनके शिष्य। पंथ फकीरी के, ये गुरु॥2॥
अलख मल्हारी, वीर नाथ सिद्ध। स्फटिक पंथ के, अति अनूठे॥3॥
नाथ कहे यह, पश्चिम मण्डल। भ्रम मिटे और, भ्रम भू मण्डल॥4॥
नाथ अड़बंग, तो सबसे न्यारे। उलटी वाणी, गुरु गोरख प्यारे॥1॥
सिद्ध पंथ के, गुरु निरंजन। नाथ सिद्ध थे, भव दुःख भंजन॥2॥
जटाधारी और धर्मनाथ जी। धर्म शास्त्र और वेद पाठ॥3॥
कहे नाथ श्री, मंगल वाणी। जोगी त्याग और जन्म मानी॥4॥
मल्लिक नागा, नागार्जुन सिद्ध। अलख निरंजन, औघड़ सिद्ध॥1॥
पिप्पल नाथ और मुकुंदराज। हरी भक्त थे, नाथ सन्यासी॥2॥
राम भक्त थे, काक भुशुण्डि। नाथ योगी, बैताल लीला॥3॥
राम पंथ के, सुखदेव नाथ। कथा भागवत, संत के साथ॥4॥
नाथ कहे जो, राजा परीक्षित। मुक्त किया वो, नाथ श्री लक्षित॥5॥
ज्ञान, निवृत्ति, गहनी नाथ। ज्ञान गोरख, इनके साथ॥1॥
मालिन के शिष्य, महिंद्र नाथ। किया वारकरी, सन्यासी पंथ॥2॥
देवगिरि एकनाथ, और संत। वारकरी पंथ में, भय प्रसिद्ध॥3॥
पंथ वारकरी, जन मन रंजन। हरी हर बोलों, अलख निरंजन॥4॥
नाथ कहे जो, सतत संगति। जीव शिव में, उत्तम गति॥5॥
ऐसे नव नाथ, चौरासी सिद्ध। अनन्त कोटि, इन्हे जो सिद्ध॥1॥
नाथ आदि और आदि का योग। भाव भक्ति की, बढ़ी अनूठी॥2॥
योग ध्यान और समाधि साधना। उन्नति विवेक, आत्म चिंतन॥3॥
तंत्र मंत्र और शक्ति साधन। पाप ताप को, किया निवारण॥4॥
भव भक्ति दो, चारो साधन। करते रक्षा, सदा काल॥5॥
नाथ कहे यह, पंथ साधन। होंगे नर नारि, अलख निरंजन॥6॥
( पुस्तक 'श्री नाथ सिद्ध पाठ'
लेखक श्री महंत गुरु डॉ. योगी विलास नाथ जी महाराज (के सौजन्य से)
अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बाराह पंथ योगी महासभा
अध्यक्ष :प्रचार प्रसार )